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शनिवार, 14 जनवरी 2012

राहू कराता है मादक पदार्थो का सेवन

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक की कुंडली से यह पता चल जाता है की वह मादक पदार्थो का सेवन करता है या नहीं | इससे उसे ठीक करने में भी मदद मिलती है | अच्छी दशा आने पर वह खुद अपना इलाज कराता है और जीवन में सफल रहता है | खाने - पीने वाली वस्तुओ का सम्बन्ध चन्द्रमा से है और राहू के नक्षत्र - आद्रा , स्वाती , शतभिषा में दोनों की उपस्थिति , दुसरे भाव के स्वामी की नीच राशी में मौजूदगी और खुद राहू का साथ बैठना जातक द्वारा मादक पदार्थो के सेवन का स्पष्ट संकेत कराता है | अपनी नीच राशी वृश्चिक में चन्द्रमा अक्सर जातक को मादक पदार्थो का सेवन कराता है | क्रूर गृह शनि , राहू पीड़ित बुध और क्षीण चन्द्रमा इसमें इजाफा करते है | हालाँकि वृश्चिक पर वृहस्पति की द्रष्टि इसमे कुछ कमी करती है और जातक बदनाम होने से बच जाता है | जिस जातक की कुंडली में एक या दो ग्रह नीच राशी में होते है और चन्द्रमा पीड़ित होकर शत्रु ग्रह में दूषित होता है उसमे मादक पदार्थो के सेवन की इच्छा प्रबल होती है | द्वितीय भाव जिसे भोजन , कुटुंब , वाणी आदि का भाव भी कहा जाता है , के स्वामी की स्थति से भी उसके द्वारा मादक पदार्थो के सेवन का ब्यौरा मिल जाता है | कलयुग में राहू शनि मंगल व् क्षीण चन्द्रमा ग्रहों की मानसिक चिन्ताओ को उजागर करने में आगे रहते है | शुक्र की अपनी नीच राशी कन्या में मौजूदगी मादक पदार्थो के सेवन का प्रमुख कारण बनती है | नीच गृह लोगो को नशा कराते है , जिससे जातक अपने साथ ही साथ अपने परिवार को भी अपमानित कराता है | प्रख्यात ज्योतिषियों के मतानुसार मकर लग्न में नीच का वृहस्पति जातक को अफीम का शौकीन बनता है | द्वादश भाव के स्वामी का शत्रु या नीच राशी में होना जातक को नशेडी बनता है | कमजोर लग्न भी मित्र ग्रहों से सहयोग न मिलाने से नशे की तरफ बदता है लग्न पर पाप ग्रहों की द्रष्टि भी मादक पदार्थो का सेवन करती है | पेट , जीभ और स्नायु केन्द्रों पर बुध का अधिकार होता है | बुध को मिश्रित रस भी पसंद है | शुक्र का वीर्य , काफ , जल , नेत्र और कमंगो पर अधिकार है | अत : इन दोनों के द्वितीय भाव से सम्बंधित होने से पीड़ित होने से और द्रष्टि होने से जातक द्वारा मादक पदार्थो का सेवन करने और नहीं करने का पता चलता है | मंगल , शनि , राहू और क्षीण चन्द्रमा की द्रष्टि उत्तेजना बढाती है | जो जातक को नशेडी बनने पर मजबूर कर देती है | नवांश कुंडली में पंचम भाव के स्वामी पर नीच या पीड़ित शनि , राहू की द्रष्टि मादक पदार्थो का सेवन कराती है | सूर्य की नीच राशी तुला में ये स्पष्ट लिखा है की जातक शराब बनाने और बचने वाला होता है | कर्क राशी में मंगल नीच का होता है | अत : वह चंचल मन वाला और जुआ खेलने में विशेष रूचि रखता है | बुध की नीच राशी मीन है| यह जातक को चिंतित रखता है और उस की स्मरण शक्ति भी ख़राब होती है | कन्या में शुक्र पीड़ित होकर मद्यपान की और ले जाता है | शनि मेष में नीच होता है | वह जातक से जालसाजी , फरेब करने के साथ ही नशा भी करता है | राहू वृश्चिक में नीच का होता है , वह जातक को शराब के आलावा कोकीन , अफीम , हिरोइन आदि का भी टेस्ट कराना चाहता है | आयुर्वेद में छ : रसो - मधुरम , अमल , लवण , कषाय, कटुक व् रिक्त का उल्लेख मिलता है | ज्योतिष में शुक्र , मंगल , वृहस्पति सूर्य व् चन्द्रमा को इनका स्वामी माना जाता है | राहू , शुक्र , चन्द्र व् पीड़ित बुध की दशा , अन्तर्दशा , प्रत्यंतर दशा आदि तथा क्रूर ग्रहों मंगल व् शनि की द्रष्टि जातक को नशे की ओर धकेलती है | मजबूत वृहस्पति की द्रष्टि इसमे कमी रहती है | हालाँकि यह आवश्यक है की उस लग्न विशेष में वृहस्पति मारक की भूमिका में न हो | यूनानी लोगो में एमीथिष्ट ( कटेला ) से बने प्यालो में शराब पीने का प्रचलन था | माना जाता है कि इससे नशा करने वाले जातक को कटेला पहनाकर नशा छुड़वाया जा सकता है | संभव है की वह पूरी तरह नशा छोड़ दे |